धूप और छाँव चलें संग संग, यही तो हैं जीवन के रंग!

अनुभूति काबरा

जीवन के ये रंग, धूप-छाँव नाट्य संमूह अटलांटा में पिछले १० वर्षों से बिखेरता आ रहा है। धूप- छाँव अटलांटा का अकेला हिन्दी नाट्य समूह ,जिसे इसकी संस्थापिका ‘संध्या भगत’ बहुत चाव से चला रही हैँ। धूप छाँव का एक उद्देश्य दक्षिण-पूर्वी एशिया की संस्कृति से लोगों को जोड़े रखना भी है। धूप छाँव न सिर्फ दर्शकों का मनोरंजन करता है बल्कि कई कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का एक बहुत ही अच्छा मंच भी प्रदान करता है। अपनी  दसवीं वर्षगाँठ को धूप छाँव ने धमाकेदार तरीके से मनाया और नए व पुराने  कलाकारों ने इसमें  उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। 



इस वर्ष जो कार्यक्रम धूप छाँव ने प्रस्तुत किये उनमे नाटक,नुक्कड़ नाटक, बॉलीवुड नृत्य, दास्तानगोई  तो थे ही ,साथ ही एक नया कार्यक्रम भी था ‘धूपछाँव का मुकाबला’ जिसमें कलाकारों को अपनी योग्यता को दर्शाने का भरपूर मौका मिला। .तीन घंटे के इस रंगारंग कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे अटलांटा के महावाणिज्यदूत (Consul General ) नागेश सिंह जी और धर्मवीर सिंह जी।


दास्तानगोई का मतलब है कहानी कहने की कला है. यह एक सदियों पुरानी कला है। दास्तानगोई करने वाले कलाकार को दास्तानगो कहते हैं। यह कला समय के साथ लगभग ख़त्म सी हो गयी थी। कुछ समय पहले इसे जीवनदान मिला और पिछले सालों में भारत में इसके कई प्रदर्शन हुए। ‘धूप छाँव’ इस बार अटलांटा में पहली बार दास्तानगोई लेकर आया। यह एक बिलकुल नया प्रयोग था। दास्तानगोई अक्सर चुटीली कहानियों या अनोखे कारनामों को बयान करतीं हैं लेकिन संयोजिका संध्या भगत ने लेखक 'सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय' की एक संजीदा कहानी को चुना, जो भारत और पाकिस्तान के विभाजन १९४७ के हालातों पर आधारित  थी। यह कहानी  समकालीन समाज की स्थितियों पर भी खरी उतरती है। इसमें एक बहुत सुन्दर सन्देश निहित था। जिसे दर्शकों ने बहुत पसंद किया और भूरि- भूरि प्रशंसा भी की। इस दास्तानगोई के दास्तानगो थे “अभिनव डेहरिया, आकांक्षा राजपाल, सचिन बापट, अनुभूति काबरा, सतीश धर्मराजन और दर्शन कौर “ निर्देशिका संध्या भगत का यह नया प्रयोग बहुत सफल रहा और दास्तानगोई ने दर्शकों की बहुत सी सराहना बटोरी, इसका अंदाज़ा सभागार में पसरे शाँत वातावरण से लगता था। 



कोई भी रंगारंग कार्यक्रम बॉलीवुड नृत्य के बिना अधूरा सा लगता है। माधुरी दीक्षित मशहूर सिने तारिका हैं।  हाल ही में उन्होने उम्र के ५० वंसत पार किए। अगला कार्यक्रम उनके सम्मान में एक नृत्य प्रस्तुति था।  बहुमुखी प्रतिभा की धनी रेनू थपलियाल ने इस नृ्त्य को प्रस्तुत किया। 

दास्तानगोई के बाद समय था अगली नाटिका ‘गड़बड़घोटाला’ का। जी हाँ... गड़बड़ घोटाला! !!यह एक बहुत ही मनोरंजक नाटिका थी, हिन्दी भाषा के समर्थन में। इसमें भारत के अलग अलग राज्यों और भाषाओँ की झलकियां मिलीं और एक रोचक सन्देश भी मिला कि साझी भाषा एक न होने से कैसी हास्यास्पद स्थिति पैदा हो जाती है।  हिंदी हमारी राजकीय भाषा  तो है परन्तु राष्ट्रभाषा के रूप में नहीं अपनाई जा सकी है। जबकि यही एक भाषा है जो हम सबको एकसूत्र में पिरि सकती है। हमें हिंदी सीखने और बोलने का प्रयास करना चाहिए। सभी कलाकारों ने अपने राज्य और भाषा का बहुत ही अच्छा प्रदर्शन किया और दर्शकों ने इसका भरपूर आनन्द उठाया। इस  नाटिक  में भाग लिया अर्पणा पुरानी, वीणा काटदरे, परेश जैन, माधव काटदरे, आकांक्षा पतंगे, अंजली छाबड़िया, विक्की अधिकारी, अरुणा विनोद, मीनाक्षी मेहता, रेनू कुमार और  सुपर्णा पाठक ने। इस नाटिक का लेखन व  निर्देशन  किया संध्या भगत ने।


इस नाटक के बाद मध्यांतर हुआ जहाँ जलपान की सुविधा थी। मध्यांतर समाप्त होने होने को ही था कि एक डमरू की आवाज़ ने सबको अपनी ओर आकर्षित किया। पहली बार नुक्कड़ नाटक कि परंपरा का आरंभ यहाँ से हुआ। दूसरी लघु नाटिक "नमूज़ी, खरबूज़ी और तोता" की शुरुआत हुई कैफेटेरिया से। जिसने दर्शकों का कौतूहल  इतना बढ़ा कि वे कलाकारों के पीछे-पीछे सभागार तक हो लिए। यह नाटक भविष्यफल बताने वाले तोते की परंपरा पर एक व्यंग्य था, कॉलेज के छात्र-छात्रा अपना भविष्यफल जानने के लिए नमूज़ी और खरबूज़ी को पैसे देते हैं और उनका तोता एक पर्ची निकाल कर देता है। छात्रों को धीरे धीरे पता चलता है कि तोता बेसिर पैर की बातें बता रहा है। अंत में उनको समझ आता है  भविष्य अपने कड़ी मेहनत  बनता है न कि तोते के पर्ची उठाने से । इस नाटक के चरित्रों को बखूबी निभाया निदा पवार शरीफ़, नोमाना ख़ान, निधि मिश्रा, रोज़ीना गिलानी, निधि पीपल, नवीन गुरनानी, जयेश जुरानी, आलोक शर्मा और सरफ़राज़ ख़ान ने। 


प्रसिद्ध लेखक के. पी. सक्सेना द्वारा रचित नाटिका ‘दस पैसे में तानसेन” के विचार  पर आधारित इस नाटिका को  रूपान्तरित किया संध्या भगत ने ,जो इसकी निर्देशिका भी थीं।
कार्यक्रम में कई ऐसे कलाकारों को भी सम्मानित किया गया जो धूप छाँव से पिछले १० सालों से जुड़े रहे हैं।ये धूपछाँव की एक मस्तीभरी अवार्ड सैरेमनी थी।


फिर आया एक रोमांचक मुकाबला - धूप छाँव का मुकाबला।  इस प्रतियोगिता में हर प्रतियोगियों को २.५ मिनट का समय दिया गया।  उन्हें अपनी पसंद के विषय पर अभिनय करके दिखाना था। कलाकार पूरी तैयारी के साथ आये थे। उनका उत्साह देखते ही बनता था। कोई शराबी का भेष धर कर आया, तो कोई पंजाबी आंटी का, किसी ने विकलांग व्यक्ति के मनोभावों का प्रदर्शित किया तो किसी ने भविष्य के मानव की पर्यावरण पर ।जयेश जुरानी, श्री वोरा, सचिन बापट, कमलेश चुघ, निधि मिश्रा, आलोक शर्मा, आकांक्षा पतंगे, सतीश धर्मराजन ने इसमें हिस्सा लिया।



और अंत में पूरे धमाल के साथ एक बॉलीवुड नृत्य से हुआ। इसका सभी को बेसब्री से इंतज़ार था, "नगाड़ा संग ढोल" गीत पर रहीम हुसैन (कोरियोग्रफर) द्वारा सिखाये हुए नृत्य से नर्तकों व नर्तकियों ने ऐसा समां बाँधा कि दर्शक झूम उठे. रंग बिरंगी पोशाकों में सजे कलाकारों ने जब एक लय से नृत्य किया तो कोई भी ताली बजाये बिना नहीं रह सका। इस नृत्य में सिर्फ नारी शक्ति ने ही हिस्सा नहीं लिया बल्कि पुरुष शक्ति ने भी बढ़ चढ़ कर भाग लिया। विकास जैन, मोइज हुसेन, नीतू शर्मा, रेनू कुमार,आरती लूनावत,शबाना सईद, श्री वोरा, व्योमा गुप्ता, अरुणा विनोद,तराना विज, निधि पीपल,वर्षा गुप्ता की इस प्रस्तुति से कार्यक्रम का बहुत खूबसूरत समापन हुआ. 


असलम परवेज़ व रेनुथपलियाल ने मंच का संचालन बहुत ही सुचारूपूर्ण तरीके से किया।
रंगमंच की रोशनी में तो कलाकार चमकते हैं लेकिन रंगमंच पर वह रोशनी मंच के पीछे के नायकों के कारण होती है।  इसमें सभी कुछ आता है चाहे वह खाने का बन्दोबस्त करना हो या  मंच सजाना हो या फिर कुछ और..इस सबको बहुत ही सुचारु पूर्ण तरीके निबाहा हमारे दल  के  कार्यकर्ताओं: एकता नरूला सेठी,माधव कातदरे,बिमल पाठक,नीतु चौहान,नवीन त्यागी,शंकर महादेवन, अनिल कंवल भगत, मीनाक्षी अय्यर,गंधर्व भगत,शिवाली दर्यापूरकर,राज वोरा,विनीता गोयल,संजीव अग्रवाल,पवनदीप सिंह,रविगुप्ता,तलत अल्वी,शिरीशा अधिकारी,पुनीत भटनागर,विजय टंडन,गुरुपदेश बेदी,गिरी कनेटी, जयश्री बवेज़ा ने।


अर्थ के बिना तो कुछ भी संभव नहीं हमारे मुख्य दानकर्ता थे: सैयद हफीज़, शमीम व नाज़नीन दलवाई,कार्तिकेय भगत,ज्योतिन्द्र त्रिवेदी,वैंकट गद्दाम,पटेल ब्रदरस,२७ ग्रुप।
धन्यवाद एडवर्ड,जीन,विनीता,ग्लोरिया,बियंका,सुभाष व राज राजदान, शेखर नारायणन,नज़ीरा दाऊद,शिव अग्रवाल,अक्सा फरुख़ी,लक्ष्मीकाँत पंड्या,महेश पटेल जी का।
टीवी एशिया, ए.आई.बी टीवी (world stories with mama Koku) ख़बर,अटलांटा दुनिया,एन आर आई पल्स,इंडिया ट्रिब्यून,वॉव नाऔ,राष्ट्र दर्पण,देसी मोजों आदि।
अगले साल फिर से मिलने का वादा करके धूप छाँव परिवार ने एक दूसरे से विदा ली और संध्या जी का तहे दिल से धन्यवाद किया।